स्वदेशी डेंगू वैक्सीन डेंगीऑल का परीक्षण अंतिम चरण में
भारत की अपनी डेंगू वैक्सीन डेंगीऑल के परीक्षण अंतिम चरण में पहुँच गए हैं और इसके 2027 के अंत तक उपलब्ध होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह वैक्सीन भारत में ही विकसित की गई है और इसे डेंगू के चारों प्रकारों से बचाव के लिए तैयार किया जा रहा है। यदि यह परीक्षणों में सफल रहती है, तो भारत को डेंगू से लड़ने के लिए एक स्वदेशी और किफायती साधन मिल सकेगा।
डेंगीऑल के तीसरे चरण के परीक्षण में देश के 20 केंद्रों पर 10,500 से अधिक प्रतिभागियों को शामिल करने की योजना है। प्रतिभागियों की सुरक्षा और वैक्सीन की प्रभावशीलता को दो वर्षों तक देखा जाएगा। शुरुआती परीक्षणों में सुरक्षा को लेकर कोई गंभीर चिंता सामने नहीं आई है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
स्वदेशी वैक्सीन का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि भारत में डेंगू का बोझ बहुत अधिक है और हर साल लाखों लोग इससे प्रभावित होते हैं। आयातित वैक्सीन की तुलना में स्वदेशी उत्पादन से कीमत कम रहने और आपूर्ति स्थिर रहने की उम्मीद की जाती है। इससे सरकारी टीकाकरण कार्यक्रमों में भी इसे शामिल करना आसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन के आने तक मच्छर नियंत्रण ही सबसे भरोसेमंद बचाव है। घरों के आसपास पानी जमा न होने देना, कूलर और गमलों की नियमित सफाई तथा मच्छरदानी का उपयोग डेंगू से बचाव के सरल लेकिन प्रभावी उपाय हैं। स्वदेशी वैक्सीन की सफलता भारत के स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि होगी।
