सीजेपी नेताओं की रिहाई, शांतिपूर्ण प्रदर्शन अधिकार पर बहस

कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया। विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने दोनों के शांति बनाए रखने के लिखित आश्वासन के बाद रिहाई का आदेश दिया।

दोनों नेताओं ने आश्वासन दिया है कि जब तक जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में फिर से अधिसूचित नहीं किया जाता, वे वहाँ प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। दोनों ने शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का मूल अधिकार है और निर्दिष्ट प्रदर्शन स्थलों की व्यवस्था जल्द स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि नागरिक अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रख सकें।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने और अपने अधिकारों की जानकारी रखने का हक है। यदि किसी के साथ अन्याय होता है, तो उसे कानूनी सहायता लेने और संबंधित आयोग या प्राधिकरण तक अपनी बात पहुँचाने का पूरा अधिकार है। जागरूकता ही अधिकारों की सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। समाज के हर वर्ग को इस दिशा में साथ मिलकर काम करना होगा।