विशेष रिपोर्ट: छोटे शहरों में डिजिटल भुगतान की बढ़ती स्वीकार्यता
त्योहारी खरीदारी के इस मौसम में छोटे शहरों और कस्बों में डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ा है। किराना दुकानों से लेकर कपड़ों और मिठाइयों की दुकानों तक अब क्यूआर कोड आम नजर आता है। जानकारों का कहना है कि नकदी की जगह मोबाइल से भुगतान की सुविधा ने ग्राहकों और दुकानदारों दोनों का काम आसान कर दिया है। छोटे दुकानदारों के अनुसार डिजिटल लेनदेन से हिसाब-किताब साफ रहता है और चिल्लर की समस्या भी खत्म हुई है। बुजुर्ग ग्राहक भी अब धीरे-धीरे इ बैंकों और भुगतान कंपनियों की ओर से छोटे शहरों में जागरूकता के प्रयास भी इस बढ़त की वजह बने हैं। साथ ही विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पिन और एकमुश्त कोड किसी के साथ साझा न करना इस बदलाव का जरूरी हिस्सा है।स तरीके को अपना रहे हैं, जबकि युवा पीढ़ी के लिए यह रोजमर्रा की आदत बन चुकी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल भुगतान की यह बढ़ती स्वीकार्यता छोटे शहरों की अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता और रफ्तार दोनों ला रही है। आने वाले वर्षों में यह प्रवृत्ति और गहरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
