विशेष रिपोर्ट: त्योहारी मौसम में गांव लौटते प्रवासी मजदूर

त्योहारी मौसम आते ही महानगरों से गांवों की ओर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या बढ़ जाती है। फैक्ट्रियों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले ये श्रमिक दीपावली पर अपने परिवारों के साथ समय बिताने घर पहुंचते हैं। उनके लौटने से गांवों के बाजारों में रौनक बढ़ती है और स्थानीय कारोबारियों की बिक्री में भी इजाफा होता है। जानकारों का कहना है कि घर भेजा गया पैसा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का एक अहम आधार है। यात्रा लंबी और भीड़भाड़ वा घर लौटने पर परिवार और मोहल्ले के लोग इनका गर्मजोशी से स्वागत करते हैं और बच्चों के लिए लाए गए उपहार त्योहार की रौनक बढ़ा देते हैं। साल भर की यह आवाजाही शहर की कमाई और गांव की जिंदगी के बीच के रिश्ते को बरकरार रखती है।ली होने के बावजूद परिवार से मिलने की खुशी इन्हें उत्साहित करती है। त्योहारों के बाद ये मजदूर फिर काम पर लौट जाते हैं, लेकिन अपने साथ गांव की यादें और नई ऊर्जा लिए हुए। उनके इस आवागमन से शहर और गांव दोनों की जीवनधारा जुड़ी रहती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रवासी मजदूरों की मेहनत देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।