आरबीआई ने रेपो दर बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत की, महंगाई चिंता बरकरार

भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी और अपने रुख को तटस्थ से बदलकर संतुलित कड़ाई वाला कर दिया। यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया, हालांकि नीति रुख को लेकर समिति के सदस्यों में मतभेद भी दिखे। महंगाई पर काबू पाना इस फैसले का मुख्य कारण रहा।

सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई, जो आरबीआई की छह प्रतिशत की सहनशीलता सीमा के करीब है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है और अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में औसत महंगाई छह प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। डिप्टी गवर्नर ने महंगाई की उम्मीदों को स्थिर करने के लिए और बढ़ोतरी की चेतावनी दी है।

दिलचस्प बात यह है कि दर बढ़ोतरी के साथ ही आरबीआई ने 2.5 लाख करोड़ रुपये की तरलता भी व्यवस्था में डाली, जिससे नीति के संकेतों को लेकर बाजार में चर्चा छिड़ गई है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार महंगाई पर काबू और वृद्धि को बचाए रखने के बीच संतुलन बनाना केंद्रीय बैंक के लिए बड़ी चुनौती होगी।