एनएचआरसी अध्यक्ष बोले, भारत में मताधिकार मानवाधिकार नहीं

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष वी. रामसुब्रमण्यम ने पटना में आयोजित शिविर सुनवाई के दौरान कहा कि भारत में मत देने का अधिकार मानवाधिकार नहीं, बल्कि वैधानिक अधिकार है, भले ही मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा में इसे मान्यता मिली हो। उनके इस बयान पर देशभर में बहस छिड़ गई है।

अध्यक्ष ने तर्क दिया कि यदि मताधिकार मानवाधिकार होता तो यह सभी व्यक्तियों को उपलब्ध होता, लेकिन कानून ने इसे अठारह वर्ष से ऊपर के और एक क्षेत्र में रहने वाले लोगों तक सीमित कर दिया है। उन्होंने कहा कि अधिकार की सार्वभौमिकता और वैधानिक प्रतिबंधों के बीच का यह अंतर ही मूल कठिनाई है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर देश में व्यापक आंदोलन चल रहा है।

पटना में सात और आठ अक्टूबर को हुई खुली सुनवाई में आयोग ने लगभग 73 मामलों पर विचार किया, जिनमें से 29 मामलों को सुनवाई के बाद बंद कर दिया गया। बिहार सरकार ने बंद हुए 20 मामलों में 1.40 करोड़ रुपये के मुआवजे के भुगतान का प्रमाण भी प्रस्तुत किया। आयोग ने कहा कि पीड़ितों को समय पर राहत दिलाना उसकी प्राथमिकता है।