बिहार में मानवाधिकार सुनवाई, 20 मामलों में 1.40 करोड़ मुआवजा

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पटना में दो दिवसीय खुली सुनवाई में बाल श्रम से जुड़े चौंकाने वाले मामले सामने आए। दो गैर-सरकारी संगठनों के सूचना अधिकार आवेदनों के जवाब में सरकारी विभाग ने ही स्वीकार किया कि एक मामले में 400 और दूसरे में लगभग 200 बच्चे बाल श्रम में लगे हुए थे। आयोग के अध्यक्ष ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।

अध्यक्ष वी. रामसुब्रमण्यम ने बताया कि विभाग के अधिकारियों को बाल श्रम और बंधुआ श्रम के बीच अंतर को लेकर भ्रम था। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना सहमति के काम करना बंधुआ श्रम है और बच्चे सहमति नहीं दे सकते। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान मिल रहा है, तो श्रम विभाग को पहले यह मानना चाहिए कि यह बंधुआ श्रम का मामला हो सकता है।

सुनवाई के दौरान कुल 73 मामलों पर विचार हुआ और 29 मामलों का निपटारा किया गया। बिहार सरकार ने बंद किए गए 20 मामलों में 1.40 करोड़ रुपये के मुआवजे के भुगतान के दस्तावेज सौंपे। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की खुली सुनवाई पीड़ितों को न्याय तक पहुंच आसान बनाती है।