शहरों के कचरे की चुनौती, समाधान पर विशेष रिपोर्ट

बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरों में कचरे की समस्या विकराल होती जा रही है। हर दिन हजारों टन कचरा निकलता है, जिसके निपटान में नगर निगमों के पसीने छूट रहे हैं। लैंडफिल साइटें भर चुकी हैं और कचरे के पहाड़ पर्यावरण के लिए खतरा बन रहे हैं। यह विशेष रिपोर्ट शहरों के कचरे की चुनौती और उसके समाधान पर केंद्रित है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कचरा प्रबंधन में सबसे बड़ी चुनौती कचरे का पृथक्करण है। गीले और सूखे कचरे को अलग न करने से रीसाइक्लिंग मुश्किल हो जाती है। कई शहरों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण शुरू हुआ है, लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे। प्लास्टिक कचरा तो सबसे बड़ी समस्या है।

हालांकि कुछ शहरों ने इस दिशा में अच्छी पहल की है। इंदौर जैसे शहरों ने कचरा प्रबंधन में मिसाल कायम की है। वहां 100 प्रतिशत कचरे का पृथक्करण और प्रसंस्करण होता है। कचरे से खाद, बायोगैस और बिजली बनाने की परियोजनाएं चल रही हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छा प्रदर्शन करने वाले शहरों को पुरस्कृत भी किया जा रहा है।

पर्यावरणविदों का मानना है कि कचरे की समस्या का स्थायी समाधान 3आर – रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकिल में है। लोगों को कम कचरा पैदा करने के लिए प्रेरित करना होगा। सरकार को कचरा प्रबंधन के लिए बजट बढ़ाना होगा और तकनीक में निवेश करना होगा। यदि समय रहते ठोस कदम न उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो जाएगी।