वंचित बच्चों तक शिक्षा पहुँचाना समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है
वंचित बच्चों तक शिक्षा पहुँचाना समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। आज भी कई बच्चे आर्थिक तंगी, दूरी या जागरूकता की कमी के कारण स्कूल से दूर रह जाते हैं। शिक्षा के बिना ये बच्चे अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं और गरीबी का चक्र पीढ़ियों तक चलता रहता है। इसलिए हर बच्चे को स्कूल तक पहुँचाना केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है।
शिक्षा कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुफ्त किताबें, दोपहर का भोजन और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं ने कई बच्चों को स्कूल से जोड़ा है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। मोहल्लों में स्वयंसेवी शिक्षण केंद्र, पुस्तकालय और अभिभावकों को जागरूक करने के अभियान बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने में मदद करते हैं। जब समुदाय बच्चे की पढ़ाई को अपनी जिम्मेदारी समझता है, तो कोई बच्चा पीछे नहीं रहता।
जरूरत है कि हर गाँव और बस्ती में शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित हो और बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल, कला और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी मिले। शिक्षित बच्चा ही कल का जागरूक नागरिक बनेगा और समाज को आगे ले जाएगा। वंचित बच्चों की शिक्षा में निवेश, देश के भविष्य में निवेश है।
