महिला सशक्तिकरण की रंगोली से गाँवों में फैल रहा जागरूकता संदेश
महिला सशक्तिकरण की रंगोली से गाँवों में जागरूकता का संदेश फैल रहा है। जब महिलाएँ सामूहिक रूप से रंगोली बनाती हैं, स्वयं सहायता समूह चलाती हैं और अपने अधिकारों की बात करती हैं, तो पूरे गाँव का माहौल बदल जाता है। रंगोली यहाँ केवल कला नहीं, बल्कि महिलाओं की एकजुटता और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गई है।
महिला समूहों का कहना है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। जब महिला अपनी कमाई से घर का खर्च चलाती है, तो परिवार में उसकी बात का वजन बढ़ता है और बच्चे, विशेषकर बेटियाँ, पढ़ाई की ओर प्रेरित होती हैं। समूहों में बचत, छोटे व्यवसाय और सरकारी योजनाओं की जानकारी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाती है।
जरूरत है कि समाज महिलाओं के काम को सम्मान दे, उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान दे और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में बराबर का स्थान दे। जब महिला सशक्त होती है, तो पूरा परिवार और पूरा गाँव आगे बढ़ता है। सशक्तिकरण का यह संदेश रंगोली के रंगों की तरह हर घर तक पहुँचना चाहिए।
