भारत मॉरीशस कर संधि में मुख्य उद्देश्य परीक्षण का नया प्रावधान
भारत और मॉरीशस के बीच दोहरे कराधान से बचाव की संधि में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। नए प्रावधान के तहत मुख्य उद्देश्य परीक्षण यानी प्रिंसिपल पर्पज़ टेस्ट लागू किया गया है, जिससे संधि का लाभ केवल वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य वाले मामलों में मिलेगा।स्पष्ट किया गया है कि 1 अप्रैल 2017 से पहले किए गए निवेश इस दायरे से बाहर रहेंगे। इसका अर्थ है कि पुराने निवेशों पर पूर्व व्यवस्था का संरक्षण बना रहेगा, जबकि नए निवेशों पर सख्त परीक्षण लागू होगा।कर विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम संधि के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में है। साथ ही निवेशकों के लिए नियमों की स्पष्टता भी बढ़ेगी, क्योंकि पुराने और नए निवेशों की स्थिति अलग-अलग स्पष्ट कर दी गई है।विदेशी निवेश के प्रवाह पर इसका दीर्घकालिक असर देखने वाली बात होगी। कर सलाहकार निवेशकों को अपने ढाँचे की समीक्षा करने की सलाह दे रहे हैं।
