प्रत्यक्ष कर संग्रह की रफ़्तार अर्थव्यवस्था की सेहत का संकेत

चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह की गति कारोबारी जगत के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। 14 अक्टूबर तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13.21 प्रतिशत बढ़कर 13.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। प्रतिभूति लेनदेन कर यानी एसटीटी से प्राप्ति में 52 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।विश्लेषकों के अनुसार कर संग्रह की यह बढ़ोतरी कॉर्पोरेट आय, वेतनभोगी वर्ग की आय और बाज़ार गतिविधियों से जुड़ी है। शेयर बाज़ार में लेनदेन बढ़ने से एसटीटी संग्रह को बल मिला है, जो निवेशक भागीदारी को दर्शाता है।व्यापार जगत की दृष्टि से मज़बूत कर संग्रह सरकार की राजकोषीय स्थिति को सहारा देता है और बुनियादी ढाँचे पर खर्च की गुंजाइश बढ़ाता है। इससे नीतिगत स्थिरता को लेकर भरोसा भी बढ़ता है।हालाँकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि वर्ष के शेष महीनों में संग्रह की यही गति बने रहना महत्वपूर्ण होगा। अग्रिम कर की अगली किस्तों और तिमाही नतीजों से तस्वीर और स्पष्ट होगी।