भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था आठ वर्षों में 45 अरब डॉलर होगी

नई दिल्ली। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अगले सात से आठ वर्षों में 40 से 45 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है। पत्र सूचना कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में यह आकलन सामने आया है। अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों के बाद निजी कंपनियों और स्टार्टअप की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जिससे भारत की स्थिति मजबूत हुई है।बीते वर्षों में भारत ने कम लागत में उपग्रह प्रक्षेपण, चंद्र मिशन और नौवहन जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की है। अब जोर अंतरिक्ष तकनीक को कृषि, मौसम पूर्वानुमान, संचार, आपदा प्रबंधन और रक्षा जैसे रोजमर्रा के क्षेत्रों से जोड़ने पर है। इससे सेवाएं बेहतर होंगी और युवाओं के लिए शोध व रोजगार के नए अवसर बनेंगे।विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार भारत को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थान देगा। निजी निवेश बढ़ने से उपग्रह निर्माण, डेटा सेवाओं और नई तकनीक में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। छोटे शहरों के युवाओं और तकनीकी संस्थानों को भी इस क्षेत्र से जुड़ने का बड़ा मौका मिलेगा। सरकार की कोशिश है कि भारत केवल प्रक्षेपण सेवा देने वाला देश न रहे, बल्कि अंतरिक्ष आधारित सेवाओं का बड़ा केंद्र बने और देश के विकास में इस क्षेत्र का योगदान लगातार बढ़ता रहे।