कयर निर्यात ग्यारह वर्षों में चार गुना बढ़कर छियासठ सौ करोड़
भारत के कयर यानी नारियल रेशे से बने उत्पादों के निर्यात में पिछले ग्यारह वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में कयर निर्यात 1,630 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 6,614 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। यह वृद्धि चार गुना से भी अधिक है।कयर उद्योग मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में फैला है और इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को रोज़गार मिलता है। चटाई, रस्सी, ब्रश और भू-वस्त्र जैसे उत्पादों की विदेशों में माँग बढ़ी है।जानकारों का कहना है कि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, नए बाज़ारों तक पहुँच और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के प्रति बढ़ती रुचि ने इस वृद्धि को गति दी है। कयर को प्लास्टिक का विकल्प माना जाने से भी इसकी माँग बढ़ी है।उद्योग से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि निर्यात संवर्धन और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देने से आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र और मज़बूत होगा तथा ग्रामीण आजीविका को बल मिलेगा।
