विद्यार्थियों बेरोज़गारों में मानसिक तनाव का जोखिम अधिक रिपोर्ट
मानसिक स्वास्थ्य पर आई ताज़ा रिपोर्ट में विद्यार्थियों और बेरोज़गार युवाओं में मानसिक तनाव का जोखिम अधिक बताया गया है। पढ़ाई का दबाव, प्रतिस्पर्धा और रोज़गार की अनिश्चितता को इसके प्रमुख कारणों में गिना गया है।रिपोर्ट के अनुसार उपचार में देरी सबसे बड़ी चुनौती है। कई लोग लक्षण शुरू होने के लंबे समय बाद मदद के लिए आगे आते हैं, जिससे समस्या गंभीर हो जाती है। जागरूकता की कमी और सामाजिक कलंक भी इसमें भूमिका निभाते हैं।विशेषज्ञों का सुझाव है कि शैक्षणिक संस्थानों में परामर्श सुविधाएँ बढ़ाई जाएँ और युवाओं को शुरुआती लक्षणों की पहचान के लिए जागरूक किया जाए। समय पर परामर्श और उपचार से अधिकांश मामलों में सुधार संभव है।परिवार और समाज के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान गंभीरता से लेने की अपील रिपोर्ट में की गई है।
