युवाओं में बढ़ते तनाव पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान

पढ़ाई, नौकरी और सोशल मीडिया के दबाव के कारण युवाओं में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इसी को लेकर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसका मकसद युवाओं को यह समझाना है कि मानसिक परेशानी कोई कमजोरी नहीं है और समय पर मदद लेना ही समझदारी है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार चिंता, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई या काम में मन न लगना तनाव के संकेत हो सकते हैं। इन संकेतों को पहचानकर परिवार और दोस्तों से बात करना, नियमित व्यायाम, योग और ध्यान करना तथा मोबाइल का संतुलित उपयोग तनाव कम करने में मदद करता है।

अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्कूलों और कॉलेजों में काउंसलिंग की सुविधा बढ़नी चाहिए। जब युवा बिना झिझक अपनी बात कह सकेंगे, तभी मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को जड़ से कम किया जा सकेगा।