बाल श्रम रोकने को गाँव-गाँव जागरूकता अभियान तेज हुआ
बच्चों का बचपन किताबों और खेल के मैदान में होना चाहिए, काम की भट्ठी या दुकान में नहीं। इसी संदेश को लेकर इन दिनों गाँव-गाँव में बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता अभियान तेज हो गया है। समाजसेवी संगठनों और स्थानीय प्रशासन की ओर से लोगों को समझाया जा रहा है कि चौदह वर्ष से कम उम्र के बच्चे से काम करवाना कानूनन अपराध है और यह बच्चे के भविष्य के साथ अन्याय है।
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि गरीबी के कारण कई परिवार बच्चों को काम पर भेजने को मजबूर होते हैं, लेकिन इसका स्थायी हल शिक्षा और सरकारी सहायता है, न कि बचपन की कुर्बानी। गाँवों में अभिभावकों को छात्रवृत्ति, निःशुल्क किताबें और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है, ताकि कोई बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल श्रम तभी रुकेगा जब समाज इसे अपनी जिम्मेदारी समझे। दुकानदार, किसान और ठेकेदार यदि बच्चे को काम पर रखने से इनकार कर दें और पढ़ाई में उसकी मदद करें, तो बदलाव तेजी से आएगा। बच्चों के अधिकार की रक्षा करना केवल कानून का काम नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
