कोयले की रिकॉर्ड ढुलाई: बिजली संकट से बचने की रणनीति
भारतीय रेलवे ने अक्टूबर के पहले 18 दिनों में कोयले की रिकॉर्ड ढुलाई की है। रेल मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में ताप बिजलीघरों को रोज औसतन 430 कोयला रेक पहुंचाए गए, जो पिछले साल की समान अवधि से 7.1 प्रतिशत अधिक है।
1 से 18 अक्टूबर के बीच कोयला लदान सालाना आधार पर 22.5 प्रतिशत बढ़ा। 21 अक्टूबर तक 191 संयंत्रों में कोयले का भंडार 19,779.1 हजार टन था, जो मानक भंडार का 32 प्रतिशत है। हालांकि 100 संयंत्रों में भंडार मानक के एक-चौथाई से भी कम है, जो चिंता का विषय है।
मंत्रालय के अनुसार, बढ़ती ऊर्जा खपत, औद्योगिक उत्पादन में तेजी और कुछ क्षेत्रों में कमजोर वर्षा इस उछाल के पीछे हैं। त्योहारी सीजन के बाद भी बिजली की मांग ऊंची बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ते कदमों के बावजूद कोयला अभी देश की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है। चुनौती यह है कि भंडार का पुनर्निर्माण समय पर हो और सर्दियों में बिजली संकट की नौबत न आए। रेलवे की यह रिकॉर्ड ढुलाई उसी रणनीति का हिस्सा है।
