सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: बदलता युद्ध का चेहरा

आधुनिक युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका लगातार बढ़ रही है और भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में कहा कि सैन्य सेवाओं के लिए देश अपना एआई तंत्र विकसित करेगा।

उन्होंने बताया कि निर्णय समर्थन, लक्ष्य पहचान, डेटा संलयन और सेंसर-से-शूटर चक्र जैसे क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल हो रहा है। इसमें इतना संवेदनशील डेटा शामिल होता है कि इसके लिए स्वदेशी एआई परत विकसित करना जरूरी है।

रक्षा सचिव के अनुसार, राष्ट्रीय कंप्यूट संसाधनों को जुटाया जा रहा है और एआई मिशन के तहत चुने गए निजी उद्योग भागीदारों की मदद ली जाएगी। साथ ही देश में बहुस्तरीय वायु रक्षा ग्रिड और घरेलू मिसाइल उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी संप्रभुता को प्राथमिकता देते हुए चुनिंदा भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ भारत सैन्य एआई में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। ड्रोन युद्ध और साइबर खतरों के युग में यह तैयारी निर्णायक साबित हो सकती है।