हिरासत में मौत पर एनएचआरसी का पांच लाख मुआवजा आदेश रद्द
दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें दिल्ली पुलिस को हिरासत में हुई एक मौत के मामले में मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए गए थे। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने दिल्ली पुलिस की याचिका को स्वीकार करते हुए आयोग का 19 अप्रैल 2024 का आदेश रद्द कर दिया।
आयोग का आदेश नरेला औद्योगिक क्षेत्र के एक थाने में दिसंबर 2019 में रशीद रज़ा की मौत से जुड़ा था। आयोग का मानना था कि व्यक्ति पुलिस हिरासत में था और नुकसान रोकना पुलिस की जिम्मेदारी थी, इसलिए सतर्कता से आत्महत्या रोकी जा सकती थी। हालांकि अदालत ने कहा कि आयोग की कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है और स्वतंत्र आधार के बिना लापरवाही का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मौत अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इससे अपने आप लापरवाही का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। मौत के स्थान को प्रासंगिक माना जा सकता है, परंतु केवल उसी आधार पर उत्तरदायित्व नहीं ठहराया जा सकता। यह फैसला मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों और अदालतों की भूमिका के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
