एसआईआर विवाद में माकपा बना विपक्षी एकजुटता की धुरी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी विपक्षी दलों को एकजुट करने वाली प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी है। संसद के दोनों सदनों में सीमित ताकत के बावजूद माकपा ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन से बाहर के दलों को भी इस आंदोलन से जोड़ने में सफलता पाई है।
पार्टी के महासचिव एम. ए. बेबी ने विपक्षी नेताओं को पत्र लिखकर चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम पर एकजुट प्रतिक्रिया की अपील की थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रतिद्वंद्वी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से भी समर्थन मांगा और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। पार्टी ने अकाली दल, बीजू जनता दल, मक्कल निधि मय्यम और आप समेत सभी गैर-राजग दलों से संपर्क साधा है।
तीस सितंबर को हुई इंडिया गठबंधन की समन्वय बैठक में एसआईआर और चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त राजनीतिक कार्यक्रम पर सहमति बनी थी। विपक्षी दलों का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के नाम कट सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि वह स्थापित नियमों के अनुसार ही काम करता है।
