मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ी, कार्यस्थलों में पहल तेज़
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता लगातार बढ़ रही है और अब कार्यस्थल भी इस दिशा में पहल कर रहे हैं। कई संस्थानों में कर्मचारियों के लिए परामर्श सेवाएँ और तनाव प्रबंधन कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
मनोचिकित्सकों का कहना है कि काम का दबाव, नींद की कमी और डिजिटल थकान युवाओं में तनाव और चिंता बढ़ा रहे हैं। समय पर मदद लेना कमज़ोरी नहीं, बल्कि उपचार का पहला कदम है।
विशेषज्ञों ने नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, व्यायाम और परिवार-मित्रों से संवाद को मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी बताया है। उनका कहना है कि मानसिक रोगों से जुड़ा कलंक दूर करना समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
