ईरान में एक पोस्ट पर छात्रा को मौत की सजा

ईरान में 23 वर्षीय छात्रा नजमेह अमीनी को सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में मौत की सजा सुनाए जाने की खबर ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। उन पर ईशनिंदा जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक पोस्ट के लिए इतनी कठोर सजा किसी भी न्याय व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। मामला सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाजें उठने लगी हैं और ईरान से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की जा रही है। छात्रा के परिवार पर भी भारी दबाव बताया जा रहा है।

मानवाधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि विचार व्यक्त करना अपराध नहीं हो सकता। ऐसे मामलों में निष्पक्ष सुनवाई और मानवता के आधार पर राह मानवाधिकार आयोगों ने भी मामले की जानकारी मांगी है।त जरूरी है। दुनिया की नजर अब इस मामले के आगे के कानूनी कदमों पर टिकी है।