त्योहारों पर कचरा प्रबंधन की चुनौती और उसके समाधान

विशेष रिपोर्ट। त्योहारों के दिनों में बाजारों और आवासीय क्षेत्रों में कचरे की मात्रा सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। मिठाइयों की पैकिंग, सजावट का सामान, फूल-मालाएं और पूजन सामग्री का अपशिष्ट यदि सही ढंग से निपटाया न जाए तो सड़कों और नालियों में गंदगी फैलती है। इस बार कई नगर निकायों ने त्योहारों से पहले विशेष सफाई अभियान चलाया है और अतिरिक्त कचरा वाहन लगाए हैं। नागरिकों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने की अपील की जा रही है, ताकि पुनर्चक्रण योग्य सामान अलग किया जा सके। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्लास्टिक की सजावट के बजाय कागज, कपड़े और मिट्टी से बनी सामग्री का उपयोग कचरा कम करने में मददगार है। कुछ आवासीय समितियों ने अपने स्तर पर कचरा संग्रह केंद्र और खाद बनाने की व्यवस्था भी शुरू की है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सफाई कर्मियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ेदान का उपयोग और कचरा इधर-उधर न फेंकना छोटी आदतें हैं, लेकिन इनका सामूहिक असर बड़ा होता है। स्वच्छ त्योहार ही स्वस्थ समाज की पहचान है।