स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की त्योहारी कमाई बढ़ी
विशेष रिपोर्ट। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए यह त्योहारी मौसम आय का अच्छा अवसर लेकर आया है। समूहों से जुड़ी महिलाएं घरों में मिठाइयों के सहायक उत्पाद, सजावट का सामान, मोमबत्तियां, हस्तनिर्मित उपहार और पारंपरिक व्यंजन तैयार करके बाजारों और मेलों में बेच रही हैं। महिलाओं का कहना है कि सामूहिक काम से लागत कम होती है और उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर मंच भी मिलता है। कई समूहों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई है, जहां ग्राहक स्थानीय और हस्तनिर्मित सामान को पसंद कर रहे हैं। बैंक और सरकारी योजनाओं से मिला छोटा ऋण व प्रशिक्षण महिलाओं के काम आया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गतिविधियों से महिलाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ती है और परिवार की आय में स्थायी सुधार आता है। समूह की सदस्यों ने बताया कि वे कमाई का एक हिस्सा बचत में रखती हैं, ताकि भविष्य में अपने छोटे व्यवसाय का विस्तार कर सकें। त्योहारों की यह कमाई केवल धन नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास और पहचान की कमाई भी है, जो गांव की अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।
