मूक दर्शक भी अपराध में शामिल, आरोपी को नहीं मिली जमानत
दिल्ली हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए अहम टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव ने कहा कि अपराध के समय मूक दर्शक बना रहना भी उतना ही दोषपूर्ण हो सकता है, जितना अपराध करना। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत काम होते देखता रहे और चुप खड़ा रहे, तो वह तटस्थ नहीं, बल्कि अपराध में शामिल माना जाएगा।
यह मामला अजीत कुमार नाम के व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में कुमार अपने घर के बाहर मोबाइल लिए खड़े दिखे। आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को कुछ कहा, जिसके बाद बेटा चाकू लेकर कमरे से निकला और मृतक पर कई वार किए। घटना के पीछे दोनों परिवारों के बीच एक लड़की के भाग जाने को लेकर तनाव बताया गया है।
आरोपी के वकील ने दलील दी कि वह सिर्फ दर्शक था और मई 2024 से हिरासत में है, जबकि सभी गवाहों की गवाही हो चुकी है। लेकिन अदालत ने सीसीटीवी फुटेज में दिखी पूर्व सहमति के आधार पर जमानत याचिका खारिज कर दी।
