बच्चों के लोक गीतों से जीवित रहती है पुरानी परंपरा

बच्चों के लोक गीत हमारी पुरानी परंपरा को जीवित रखने का सबसे सुंदर तरीका हैं। जब बच्चे समूह में पारंपरिक गीत गाते हैं तो उनके चेहरों पर खुशी साफ दिखती है और साथ ही वे अपनी संस्कृति से भी जुड़ते हैं। ये गीत खेल-खेल में बच्चों को भाषा, लय और सामाजिक व्यवहार भी सिखाते हैं।

पहले के समय में दादी-नानी के गीत ही बच्चों की पहली पाठशाला हुआ करते थे। उन गीतों में नैतिकता, प्रकृति से प्रेम और परिवार के मूल्यों की झलक होती थी। आज भी अगर बच्चों को ऐसे गीत सुनने और गाने का अवसर मिले तो वे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे।

स्कूलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक गीतों को जगह मिलनी चाहिए। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपनी परंपरा पर गर्व करना सीखेंगे। मनोरंजन के साथ संस्कार देने वाले ये गीत आने वाली पीढ़ी के लिए अनमोल धरोहर हैं। इन गीतों को सहेजने के लिए परिवारों को भी आगे आना चाहिए और बच्चों को रोजाना गीत गाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।