तीन कल्याणकारी योजनाओं के नाम बदलाव पर बहस तेज
केंद्र की तीन कल्याणकारी योजनाओं से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम हटाकर उनकी जगह प्रधानमंत्री शब्द जोड़ने के फैसले पर सियासी बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने इस कदम को इतिहास से छेड़छाड़ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि योजनाओं की पहचान उन नेताओं से जुड़ी रही है, जिनके दौर में वे शुरू हुई थीं। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि योजनाएं जनता के लिए हैं और उनका नाम किसी पद की गरिमा से जुड़ा होना चाहिए, किसी व्यक्ति विशेष से नहीं। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि नाम बदलने से ज्यादा जरूरी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचना है। इस मुद्दे पर संसद से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चाएं जारी हैं। आम लोगों की राय भी बंटी हुई नजर आ रही है — कुछ इसे सामान्य प्रशासनिक फैसला मानते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक संदेश से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी होने की संभावना है, जबकि लाभार्थियों की नजर योजनाओं के क्रियान्वयन पर टिकी है।
