लोक नाटक के मंच पर आज भी जीवित है पुरानी कला
लोक नाटक के मंच पर आज भी पुरानी कला जीवित है। गाँवों के मेलों और त्योहारों में जब कलाकार रंग-बिरंगी वेशभूषा में मंच पर आते हैं तो पूरा माहौल जीवंत हो उठता है। उनके संवाद, हाव-भाव और गीत दर्शकों को कहानी के भीतर ले जाते हैं और लोग घंटों तक मंत्रमुग्ध होकर देखते रहते हैं।
लोक नाटक केवल मनोरंजन का साधन नहीं है। इसके माध्यम से समाज की अच्छाइयों और बुराइयों पर भी बात होती है। पौराणिक कथाओं और सामाजिक विषयों को नाटक के रूप में प्रस्तुत करके कलाकार लोगों तक संदेश पहुँचाते हैं। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
आज के दौर में लोक नाटक को सहेजने की जरूरत है। अगर युवा कलाकारों को प्रशिक्षण और मंच मिलेगा तो यह कला आगे भी जीवित रहेगी। लोक नाटक हमारी सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है और इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। इन नाटकों को देखने के लिए गाँवों के लोग दूर-दूर से आते हैं और कलाकारों का उत्साह बढ़ाते हैं।
