प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, विरासत अब ऑनलाइन सुरक्षित
देश की प्राचीन पांडुलिपियाँ हमारी सांस्कृतिक विरासत का अनमोल खजाना हैं, लेकिन समय के साथ ये नष्ट होने के खतरे में हैं। अब इन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का काम तेज हो गया है, जिससे यह धरोहर ऑनलाइन सुरक्षित हो सकेगी और शोधार्थियों तक आसानी से पहुँचेगी।
संस्कृत, पाली, प्राकृत और क्षेत्रीय भाषाओं में लिखी इन पांडुलिपियों में आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, दर्शन, साहित्य और गणित का ज्ञान छिपा है। कागज और ताड़पत्र पर लिखी ये कृतियाँ कीड़ों, नमी और समय की मार से खराब हो रही थीं। डिजिटल प्रति बनने से मूल पांडुलिपि को बार-बार छूने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटलीकरण से युवा पीढ़ी भी अपनी विरासत से जुड़ सकेगी। जब ये ग्रंथ ऑनलाइन उपलब्ध होंगे, तो देश-विदेश के विद्वान इनका अध्ययन कर सकेंगे और भारत के प्राचीन ज्ञान को नई पहचान मिलेगी।
