गुरु नानक जयंती पर गुरुद्वारों में सेवा और लंगर की तैयारी

गुरु नानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारों में सेवा और लंगर की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। सिख समुदाय के पहले गुरु की जयंती पर गुरुद्वारों में कीर्तन, कथा और प्रभात फेरियों का आयोजन होता है। संगत गुरु नानक के उपदेशों — नाम जपो, किरत करो और वंड छको — को याद करती है।

लंगर की परंपरा इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। यहाँ जाति, धर्म और हैसियत का भेद किए बिना सभी एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। सेवादारों की टोलियाँ लंगर तैयार करने, बर्तन धोने और संगत की सेवा में जुट जाती हैं। यह सेवा भाव ही गुरु नानक की शिक्षाओं का जीवंत रूप है।

गुरुद्वारों में सफाई और सजावट का काम भी चल रहा है। बच्चों और युवाओं को भी सेवा में शामिल किया जाता है, ताकि उनमें सेवा और समानता के मूल्य बचपन से ही विकसित हों।