प्रवासी मजदूरों के अधिकारों की रक्षा राज्य की जिम्मेदारी है
अपने गाँव से दूर शहरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। वे भवन बनाते हैं, सड़कें बिछाते हैं, कारखानों में काम करते हैं और घरों की देखभाल करते हैं, लेकिन अक्सर उनकी मजदूरी, रहने की जगह और स्वास्थ्य सुविधाएँ सबसे कमजोर होती हैं। काम छूटने या बीमारी पर संकट सबसे पहले उन्हीं पर आता है।
प्रवासी मजदूरों के अधिकारों में समय पर पूरी मजदूरी, सुरक्षित काम की जगह, साफ पीने का पानी, शौचालय और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा शामिल हैं। ठेकेदार के माध्यम से काम करने वालों की स्थिति और कठिन होती है। ऐसी स्थिति में मजदूर को न मजदूरी मिलती है और न ही दुर्घटना होने पर इलाज की गारंटी।
महिला प्रवासी मजदूरों की कठिनाई अलग तरह की होती है। उन्हें समान काम के लिए कम मजदूरी, असुरक्षित आवास और बच्चों की पढ़ाई की समस्या का सामना करना पड़ता है। कई बार बच्चे माता-पिता के साथ काम की जगह पर ही रहते हैं और स्कूल से दूर हो जाते हैं। यह स्थिति केवल मजदूरी का मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार से भी जुड़ी है।
समाधान के लिए मजदूरों का सरल पंजीकरण, एक जगह से दूसरी जगह चलने वाली सामाजिक सुरक्षा, मजदूरी भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था और शिकायत की त्वरित सुनवाई जरूरी है। प्रवासी मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना किसी की कृपा नहीं, बल्कि राज्य और समाज की साझा जिम्मेदारी है।
