चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों पर मतदान संपन्न
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषदों की 28 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ। देश में केवल छह राज्यों में ही विधान परिषद है, इसलिए इन चुनावों पर राजनीतिक दलों की खास नजर रहती है। परिषद के सदस्य छह वर्ष के लिए चुने जाते हैं और हर दो वर्ष में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।
विधान परिषद को राज्य विधायिका का दूसरा सदन कहा जाता है। इसके सदस्य सीधे आम मतदाताओं से नहीं, बल्कि विशेष निर्वाचक मंडलों से चुने जाते हैं। इनमें शिक्षक, स्नातक और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। मतदान आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है। परिषद का काम विधानसभा से पारित विधेयकों पर विचार करना और सुझाव देना है, ताकि जल्दबाजी में कोई कानून न बने।
परिषद के गठन या समाप्ति का निर्णय संसद करती है, लेकिन इसके लिए संबंधित राज्य की विधानसभा को विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है। जानकारों का कहना है कि दूसरा सदन अनुभवी लोगों को विधायिका में जगह देता है, जबकि आलोचक इसे खर्चीला और धीमा मानते हैं। बहरहाल, इन 28 सीटों के परिणाम आने वाले दिनों में राज्य राजनीति के समीकरणों को प्रभावित करेंगे।
