डीजीपी नियुक्ति में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चेताया
नई दिल्ली। पुलिस प्रमुख (डीजीपी) की नियुक्ति में हो रही देरी और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के दिशा-निर्देशों की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि पुलिस नेतृत्व की नियुक्ति में पारदर्शिता और योग्यता आधारित व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता।
उल्लेखनीय है कि प्रकाश सिंह मामले में 2006 में तय दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्यों को योग्य आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजनी होती है। यूपीएससी योग्यता और अनुभव के आधार पर तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल बनाता है, और राज्य सरकार इसी पैनल से डीजीपी का चयन करती है। चयनित अधिकारी को कम से कम दो साल का निश्चित कार्यकाल देना भी अनिवार्य है।
अदालत का मानना है कि इन नियमों का मकसद पुलिस नेतृत्व को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करना और प्रशासनिक स्थिरता लाना है। हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि पुलिस राज्य का विषय होने से न्यायिक हस्तक्षेप की बार-बार की प्रवृत्ति संघीय ढांचे पर सवाल खड़े करती है। बहरहाल, अदालत ने समय पर नियुक्ति को पेशेवर और स्वतंत्र पुलिस नेतृत्व के लिए अहम बताया है।
