विधवा के सीमित भूमि अधिकार अब पूर्ण स्वामित्व: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने वाला अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति एस. वी. एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने 9 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14(1) के तहत किसी हिंदू विधवा का सीमित भूमि हित पूर्ण स्वामित्व में बदल जाता है।
मामला ‘सुल्तान सिंह बनाम वित्तीय आयुक्त, दिल्ली सरकार’ का था, जिसमें कृषि भूमि के उत्तराधिकार को लेकर विवाद था। अदालत ने कहा कि धारा 51(2)(a) में ‘dies’ शब्द का सीमित अर्थ निकालना कानून की सादी भाषा के खिलाफ होगा। पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के खंडपीठ के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए अपील खारिज कर दी।
इस फैसले का सीधा असर उन हजारों विधवाओं पर पड़ेगा जिनके नाम पर कृषि भूमि का सीमित अधिकार दर्ज है। अब ऐसी भूमि के उत्तराधिकार का निर्धारण दिल्ली भू-सुधार अधिनियम की धारा 51(2)(a)(ii) और धारा 53 के तहत होगा, न कि अंतिम पुरुष स्वामी के वारिसों के पक्ष में जाने वाले प्रावधान से।
महिला अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति पर बराबर का हक ही महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान देता है। यह फैसला ग्रामीण महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकता है, बशर्ते उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी मिले।
