तेल कीमतों के झटके से भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा
कच्चे तेल की कीमतों का 111 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। शेयर बाज़ार में लगातार गिरावट इसी चिंता का प्रतिबिंब मानी जा रही है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि महंगा तेल आयात बिल बढ़ाता है, रुपये पर दबाव डालता है और महंगाई को हवा देता है। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों समेत कई वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ेगा।
हालाँकि भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और विविध आपूर्ति स्रोतों जैसे विकल्प मौजूद हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि दीर्घकाल में नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू उत्पादन बढ़ाना ही ऐसे बाहरी झटकों से बचाव का स्थायी उपाय है।
