मुंबई उच्च न्यायालय ने प्रदूषण को आपात स्थिति बताया

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई की वायु प्रदूषण की स्थिति को आपात स्थिति करार देते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि स्वच्छ हवा में साँस लेना हर नागरिक का मूल अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है।

दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुज़ुर्गों और साँस के रोगियों पर पड़ रहा है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने अदालत की टिप्पणी का स्वागत करते हुए दीर्घकालिक उपायों की माँग की है। उनका कहना है कि केवल मौसमी कार्रवाइयों से काम नहीं चलेगा, बल्कि निर्माण धूल, वाहनों और कचरा जलाने पर स्थायी नियंत्रण आवश्यक है।