मतदाता सूची संशोधन में हर नागरिक का अधिकार महत्वपूर्ण
चुनाव आयोग द्वारा 17 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष संशोधन की घोषणा के बाद मताधिकार को लेकर जागरूकता बढ़ गई है। मानवाधिकार की दृष्टि से मतदान हर नागरिक का मूल अधिकार है और सूची में नाम होना ही इस अधिकार की पहली शर्त है। अधिकार संगठनों का कहना है कि संशोधन प्रक्रिया में किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से न कटे, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। खासकर बुजुर्गों, दिव्यांगों, प्रवासी मजदूरों और पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं को प्रक्रिया में विशेष सहायता मिलनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार मतदाता घर बैठे भी अपना विवरण जांच सकते हैं और त्रुटि पर सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। सामाजिक संगठनों ने गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है, ताकि कोई भी नागरिक अपने अधिकार से वंचित न रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूती की नींव है। नागरिकों से अपील है कि वे निर्धारित समय में अपना नाम अवश्य जांचें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
