सब्जी विक्रेताओं की मेहनत से चलती है हर रसोई

हर सुबह ठेले पर ताजी सब्जियाँ लेकर निकलने वाला विक्रेता हमारी थाली का सबसे पहला साथी है। वह भोर में मंडी से सब्जी लाता है, उसे सजाकर बेचता है और घर-घर तक ताजगी पहुँचाता है। उसकी मेहनत के बिना न तो रसोई चल सकती है और न ही किसानों की उपज का सही मूल्य मिल सकता है।

सब्जी विक्रेताओं का काम आसान नहीं होता। धूप, बारिश और भीड़ के बीच उन्हें अपना ठेला चलाना पड़ता है। कई बार बची हुई सब्जी खराब हो जाती है और नुकसान भी उठाना पड़ता है। फिर भी वे मुस्कुराकर ग्राहकों से मोल-भाव करते हैं और ईमानदारी से अपना काम निभाते हैं।

ग्राहकों को चाहिए कि वे इन छोटे विक्रेताओं के साथ सम्मान और भरोसे का व्यवहार करें। उचित दाम देना और ताजी चीजों की कद्र करना ही उनकी मेहनत का सच्चा सम्मान है। जब छोटा विक्रेता खुशहाल होगा, तो किसान, बाजार और हर घर की रसोई भी खुशहाल रहेगी।