मजदूरों के अधिकारों की रक्षा से ही मजबूत बनेगा देश

देश की हर बड़ी इमारत, सड़क और कारखाने के पीछे मजदूरों के हाथों की मेहनत छिपी होती है। सुबह से शाम तक पसीना बहाने वाला मजदूर ही विकास की असली नींव है। फिर भी अक्सर उसे उचित मजदूरी, सुरक्षित काम की जगह और सम्मान की कमी का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय है।

मजदूरों को समय पर पूरी मजदूरी मिलना, काम के घंटों का पालन होना और दुर्घटना की स्थिति में इलाज व मुआवजा मिलना उनका अधिकार है। ठेकेदारों और मालिकों को यह समझना चाहिए कि मजदूर की भलाई में ही काम की गुणवत्ता और भरोसा छिपा है। श्रमिकों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं की जानकारी भी उन तक सरल भाषा में पहुँचनी चाहिए।

समाज के हर वर्ग को मजदूरों के प्रति सम्मान का भाव रखना होगा। उनके बच्चों की पढ़ाई और परिवार के स्वास्थ्य की चिंता भी सामूहिक जिम्मेदारी है। जब मजदूर सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानित होगा, तभी देश की तरक्की की रफ्तार भी मजबूत होगी।